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  <title>Hind 335/Asia 331</title>
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   <title>की लाईम बार</title>
   <description>&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;अब मुझे याद आया, मैंकुछ तैयार कर सकती हूँ। मुझे खाना पकाना नहीं आता है, लेकिन मैं अमरीकी मिठाई बना सकतीहूँ। मेरा एक ज़्यादा पसंद की मिठाई लाईम बार्स हैं, जो मैं मेरी बहिन के साथ काफ़ी बारबनाती हूँ। अब मैं आपको बताऊंगी &amp;ldquo;की लाईम बार्स&amp;rdquo; कैसे बनाते हैं:&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;ये उपकरण की ज़रूरतहैं:&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoListParagraphCxSpFirst&quot; style=&quot;text-indent: -0.25in&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Symbol&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;middot;&lt;span style=&quot;font: normal normal normal 7pt/normal &#039;Times New Roman&#039;&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;१ १/२प्याला ग्राहम क्राकर के टुकडे (~ ५ तोल) &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoListParagraphCxSpMiddle&quot; style=&quot;text-indent: -0.25in&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Symbol&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;middot;&lt;span style=&quot;font: normal normal normal 7pt/normal &#039;Times New Roman&#039;&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;२ टेबलस्पून अशुद्ध शक्कर (ब्राउन सुगर) (भूरे रंग की चीनी) &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoListParagraphCxSpMiddle&quot; style=&quot;text-indent: -0.25in&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Symbol&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;middot;&lt;span style=&quot;font: normal normal normal 7pt/normal &#039;Times New Roman&#039;&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;मक्खनकी स्वाद का खाना पकाना की शाखा (स्प्रै) &lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoListParagraphCxSpMiddle&quot; style=&quot;text-indent: -0.25in&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Symbol&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;middot;&lt;span style=&quot;font: normal normal normal 7pt/normal &#039;Times New Roman&#039;&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;८ तोलहल्का क्रीम चीज &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoListParagraphCxSpMiddle&quot; style=&quot;text-indent: -0.25in&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Symbol&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;middot;&lt;span style=&quot;font: normal normal normal 7pt/normal &#039;Times New Roman&#039;&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;१ टेबलस्पून नीबू की अभिरुचि (ज़ेस्ट) &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoListParagraphCxSpMiddle&quot; style=&quot;text-indent: -0.25in&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Symbol&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;middot;&lt;span style=&quot;font: normal normal normal 7pt/normal &#039;Times New Roman&#039;&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;१ मिठाकिया संघनित दूध का १४-तोल का कैन &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoListParagraphCxSpLast&quot; style=&quot;text-indent: -0.25in&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Symbol&quot;&gt;&lt;span&gt;&amp;middot;&lt;span style=&quot;font: normal normal normal 7pt/normal &#039;Times New Roman&#039;&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;१/३ प्यालानीबू का रस (३ या ४ अमरीकी नीबू लगेंगे) &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;सब कुछ लेकर, ये करो:&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;१ चूल्हा ३५० डिग्रीको गर्म करो &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;२ क्राकर के टुकडेऔर अशुद्ध शक्कर मिलाओ। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;३ एक ८ से ८ पैन मेंएक असफलता का पर्ण लगाओ। उस पर मक्खन की शाखा इस्तेमाल करो। &lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;४ वो टुकडे और शक्करका मिलाव पैन में दबाओ। फिर से शाखा लगाओ और दबाओ। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;५ एक साधन कटोरे मेंक्रीम चीज को मारो। उस में अभिरुचि और संघनित दूध डालो। फिर से मारो। अब उस में नीबूका रस डालो और फिर से मारो। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;६ इस मिलाव टुकडे परडालो। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;७ २५ &amp;ndash; ३० मिनट केलिए भुनाओ (पकाओ) जब तक मध्य अच्छा होगा और किनारे थोडे अलग हो रहे हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;९ ठंडा होना चाहिए।कम से कम २ घंटे के लिए ठण्डा करो। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;१० १६ बार में काटो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt;एकदम स्वादिष्ट होगा!&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Wingdings&quot;&gt;&lt;span&gt;J&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-family: Mangal, serif&quot;&gt; &lt;span&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description>
   <link>http://syllable.rice.edu/langex/BLOGS/post/32/720</link>
      <pubDate>Tue, 29 Sep 2009 13:35:45 -0500</pubDate>   
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   <title>संहिता---किसकी ज़िम्मेदारी - तूफ़ान की या हम सब लोगों की?</title>
   <description>&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-size: medium; font-family: Helvetica&quot;&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;line-height: 52px; white-space: pre-wrap; font-family: Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-size: large&quot;&gt;अगले महीने ताइवान में तूफ़ान मोराकत आया और तूफ़ान से वहां पर जोर से नुक्सान का असर पड़ा.  कुछ लोग कह रहे हैं कि विश्वव्यापी तापक्रम वृद्धि के वजह से ही तूफ़ान मोराकत जैसे बड़े तूफाने हो सकते हैं और अगर पूरा दुनिया इस बात को ध्यान नहीं देंगे तो उसका असर जो सब पड़ेंगे वह बहुत गंभीर रहेगा.  मुझे अच्छी तरह मालूम नहीं है कि विव्श्वव्यापी तापक्रम वृद्धि से क्या क्या होता है, या कि तूफ़ान मोराकत उस वजह से ही इतना बड़ा हो गया.  कम से कम पक्का है कि दुनिया में लोगों का संख्या ज्यादा हो रहा है और हम बाकि सब चीजों को ख़तम कर रहे हैं, जैसे कुछ जानवर, लकडी, और तेल.  मैदान जहाँ पर चावल, गेहू, वगैरह उगाते हैं वे ख़राब हो रहे हैं क्योंकि लोग उन जगह को ज्यादा इस्थामल करते हैं जब तक पूरी तरह सूख जाते हैं. &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;line-height: 52px; white-space: pre-wrap; font-size: large; font-family: Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;मेरे सवाल यह है कि अगर लोग अपने दुनिया का ध्यान&amp;nbsp;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-size: 35px&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-size: large&quot;&gt;रखेंगे&lt;/span&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-size: 14px; line-height: 25px; white-space: normal; font-family: arial&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;line-height: 52px; white-space: pre-wrap; font-family: Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-size: large&quot;&gt; तो वे सिर्फ कोई तूफ़ान से दरके ही ध्यान रखेंगे क्या?  &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-size: large&quot;&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;</description>
   <link>http://syllable.rice.edu/langex/BLOGS/post/32/701</link>
      <pubDate>Sun, 13 Sep 2009 08:17:30 -0500</pubDate>   
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   <title>ताइवान का तूफ़ान - मेरे ख्याल</title>
   <description>&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 10pt; line-height: 115%; font-family: Mangal, serif&quot;&gt;पहली यह तो उदास बात है कि मैं यही भी नहीं जानती थी कि ताइवान मेंतूफ़ान हुआ। अगर मेरे जैसे विश्वविद्यालय के विधयार्थियों को खबर में क्या हो रहा हैमालूम नहीं है, कितने लोग दुनिया की हालत के बारे में कुछ नहीं जानते? &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 10pt; line-height: 115%; font-family: Mangal, serif&quot;&gt;यह बात छोडकर, खबर पडने के बाद, मुझे पता चला कि ताइवान का तूफ़ान,मोराकौट, बहुत बडा था। उसका अर्थ है कि बहुत महेंगा हुआ और बहुत लोगों ने इस तूफ़ानको उनका जीवन दिया । इस में एकदम गम्भीर बात है कि ताइवान के राष्ट्रपति ने कुछ कामजल्दी से नहीं किया, इसलिए और लोग मर गये। ये एकदम कात्रिना में पीछला राष्ट्रपति बूशका काम जैसा है। मेरे ख्याल से ये बहुत बुरी बात है कि जब कुछ अभाग्य होता है, वो ज़रूरदुख की बात होगी, लेकिन अगर हम उसको और भी बूरी बात करेंगे, तो हमे क्या होगा? हमाराजग में ऐसा ही होता रहता है, इसलिए और लोग मर चूके है और मर जाएंगे। पैसे इतने महतवपूर्णतो नहीं है, लेकिन वो भी ज़्यादा कुछ जाएगा। बातचित रोककर जब हम काम करेंगे, वो दिनसब कुछ ज़्यादा अच्छा होगा। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 10pt; line-height: 115%; font-family: Mangal, serif&quot;&gt;लोग समहत है कि तूफ़ान एक बूरी चीज़ है, मगर तूफ़ान क्यों हुआ, कितनेहोते है, और इतना बूरा क्यों है, एक और बात है। एक बहुत बडा बहस है अगर दैवी विपत्तिविश्वव्यापी तापक्रम वृद्धि के वजह से होती है। दोनो शिक्षित और अनपढ लोग दोनो नज़रमें मानते हैं। लोग इस के बारे में भी झगडे कर रहे हैं, अगर विश्वव्यापी तापक्रम वृद्धिहै या नहीं। लोग जो नहीं मानते है विवेचन करते है कि कही जगह में हवा और गरम हो रहाहै, लेकिन दूसरे जगह में हवा और ठंडा हो रहा है। इसलिए, वे कहते है कि विश्वव्यापीतापक्रम वृद्धि नहीं है, सब जगह और गरम तो नहीं हो रहे है। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class=&quot;MsoNormal&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: 10pt; line-height: 115%; font-family: Mangal, serif&quot;&gt;मेरे ख्याल से ये बक्वास है। विश्वव्यापी तापक्रम वृद्धि एक सचाईहै। शक्की को में कहती है कि हाँ, एकदम ठंडे जगह और ठंडे हो रहे हैं, लेकिन यह भी वहीकारण से है। हमारे वजह से समुद्र के पानी और गरम हो रही है। इसलिए तटवर्ती जगह और गरमहो रहे है। इस कारण से और अजीब हवा और विपत्ति भी हो रहे हैं, और एकदम अलग हवा हो रहीहै। मैं नहीं जानती हूँ अगर इस तूफ़ान का कारण विश्वव्यापी तापक्रम वृद्धि है या नहीं।मैं मानती हूँ कि शायद विश्वव्यापी तापक्रम वृद्धि के वजह से इस तूफ़ान और भयानक हुआ।मैं नहीं जानती हूँ अगर सचाई में विश्वव्यापी तापक्रम व्रुद्धि के कारण से और तूफ़ानऔर ऐसी विपत्ति आ रहे हैं या सिर्फ़ अभी ऐसा युग है।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;</description>
   <link>http://syllable.rice.edu/langex/BLOGS/post/32/700</link>
      <pubDate>Sat, 12 Sep 2009 01:28:41 -0500</pubDate>   
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   <title>गुलाब महल (पुरी कहानी); संहिता, प्रज्ञा और जयमीत का सामुहिक प्रयास</title>
   <description>&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-family: Helvetica, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-size: medium&quot;&gt;&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-family: Helvetica&quot;&gt;गुलाब महल&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बहुत समय पहले, एक छोटे शहर में एक लाल हवेली थी जिसका नाम &amp;quot;गुलाब महल&amp;quot; था| हवेली तो बड़ी थी, और सुंदर भी, लेकिन अगर तुम उसके सामने होते तो तुम हवेली को ज़रूर नहीं देखते. इतने खूबसूरत थे सब बगीचे जो हवेली की सारी तरफ में थे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उस हवेली में कोई नहीं रहता था. तीन सौ सालों के लिए एक बड़े खानदान राज-रानियों की तरह रहता था उस हवेली में, लेकिन इतने साल हो चुके थे और किसी को याद नहीं था कि उनका नाम क्या था या किस वजह से उस परिवार का एक ही जन भी ज़िंदा नहीं था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सिर्फ़ एक माली था, जिसकी दिखाई से तुमको पता नहीं चलते कि यह एक, दो, या तीन सौ साल का होता!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वह माली एक झोपड़ी में रहता था, और अगर उसको हवेली के बारे में पूरी तरह मालूम था तो किसीको पता नहीं था. अगर तुम पूछते, शहेरवाले उस माली से क्यों नहीं पूछते थे कि हवेली के लोगों को क्या हुआ, तो तुमको मैं अभी यह बताती हूँ: कि बगीचे जो उस हवेली के सारी तरफ में थे मोटे मोटे गुलाबों से भरे हुए थे, और उन गुलाबों से इतने तेज़ खुशबू थी कि अगर तुम पास जाते, तो ज़रूर तुमको तुरंत नशा औरे बेहोशी पड़ती!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसीलिए वह माली को सब नज़र झुकते थे, लेकिन कोई बगीचे के आस-पास आए तो वे एकदम सब ख्याल भूलकर भाग जाते थे। अब कितने साल हुए तो माली अकेला रह रहकर बहुत गंभीर हो रहा था। दुनिया के सब अच्छे दिलवाले लोग कहाँ गये? अगर ऐसा कोई लडका या लडकी आएगा तो क्या चमत्कार होगा?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मगर अब नायक का आनेवाले वक्त ख़त्म हो रहा था। इस साल के बाद इस हवेली, जो अभी दूसरों (माली के सिवा) को कुछ नहीं था, पुरे तरह गायब होनेवाला था। अगर वो, वो जो आनेवाला था नहीं आया, इस साल में, हवेली गायब और उसके साथ हमारी माली। इन विचारों में घूमकर, माली हर दिन उसकी कुर्सी पर बैटकर परेशान हो रहा था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उसका राजा ने कितने बार उसको कहा था, &amp;ldquo;मेरी बात तो सुनिए, जब में बहार-गाव जाएगा तो हमारी हवेली पर ध्यान रको। अगर एक पल-बर भी आपका नज़र उतार जाएगा, तो मैं भी नहीं बता सकता हूँ कि हवेली क्या करेगी।&amp;ldquo; यह उसके अकेरी शब्द थे, हवेली की चक्रवाई से पहले। इन दिनों के बाद माली ने दिल बर इन शब्दों को याद रखा था, मगर अब उसका क्या फायदा था? कुछ नहीं बदलता न कोई कभी न आएगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;ldquo;आह&amp;rdquo;, माली के अकेरी दिन ऐसी ही रहेंगे, बिना दोस्त या दुश्मन, दूसरे लोगो के बिना।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पर एक दिन ऐसा आया की हवेली की माली बाहर का दरवाज़ा बंद करना भूल गयी. पास में ही, छोटे बच्चे खेल कूद रहे थे के अचानक एक बच्चे ने गेंद दूर फेंक्दी और ये गेंद हवेली के बगीचों में जा पहुंची. पर ये छोटे बच्चे हवेली के इतिहास से अनजान थे. एक छोटा सा लड़का भागते हुए हवेली की तरफ गया. दूर से एक औरत ने जोर की आवाज़ दी: &amp;quot;बेटा रुक जाओ! अन्दर मत जाना!&amp;quot; पर बच्चा अनजान था और भागता रहा जब तक वो हवेली के बगीचों के बीच में खडा था और फिर माली को देखकर डर गया और रोने लगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;माली बच्चे की तरफ गयी और कहा, &amp;quot;मत रो बच्चे! मैं तुम्हे कुछ नहीं करुँगी. ये अपनी गेंद लेलो, पर मेरे लिए एक छोटा सा काम करदो.&amp;quot; बच्चे ने डरते हुए अपना सर हिलाया. माली बोली, &amp;quot;अपनी माँ को जाके बता दो की मेरे आखरी साँसे चल रही हैं, और मेरी मौत के बाद हवेली का क्या होगा किस्सी को नहीं पता! कोई मेरी मदद कर सकता है क्या?&amp;quot; बच्चे ने तुंरत से माली के हाथ से गेंद ली और जल्दी से बाहर रोते हुए भाग गया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भागते भागते ये बच्चा सीधा अपनी माँ के पास घर गया. उसे रोते हुए माँ एकदम से चौंक कर बोली, &amp;quot;क्या हुआ बेटा?&amp;quot; बच्चे ने डरी-सहमी आवाज़ में कहा, &amp;quot;माँ...हवेली माली...आखरी सांस...मौत...किस्सी को नहीं पता!&amp;quot; माँ पहले तो एकदम चुप हो गयी - बेटे के शब्द को जोड़ने की कोशिश करती रही. अचानक से उसे याद आया के बच्चा किस हवेली के बारे में बात कर रहा था, और एकदम से बेटे के शब्द जोड़कर अर्थ निकाल ने लग गयी. फिर चिल्ला कर बोली, &amp;quot;हवेली के माली ने हमें आंखरी साँसे गिनने के लिए बोला! सब की मौत करेगी और किस्सी को पता भी नहीं चलेगा?! हे भगवान! अब क्या होगा?&amp;quot;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उस रात को वह महिला ने यह सपना देखा: वह उड़ रही थी, और नीचे था एक विशाल मैदान. जब वह जमीं की तरफ चली तो उसकी ऑंखें इतनी बड़ी हो गई! ऐसा था वह दृष्य जो उसके सामने था! हज़ार फरिश्ठे! कैसी चमकती हुई रौशनी! कैसे रेशम-से पंखे! उसको लगा कि वह सच में कोई जन्नत तक पहुँच गई! वे फरिश्ठे काफी खुसर फुसर कर रहे थे, और इतने जोर से हंस रहे थे. और - अभी क्या हुआ? अचानक से वे फरिश्ठे कहीं पर चले गए! अभी, मैदान पर एक बड़ी हवेली थी, और उसकी चरों तरफ में गुलाब के बगीचे! उस महिला ने पास चली, और एक गुलाब लेके नाक पर उठी - अरे, यह क्या था? कैसा पागलपन! पहले फरिश्ठे और अभी, एक गुलाब जिससे एक गर्म पराठे के बू आ रही थी! उसने तुंरत से उस गुलाब को फेंक दिया, और दुसरे को लिया. अभी... अरे! इस गुलाब से कचड़ा की बदबू आ रही थी! कितने गुलाबों थे, और एक की बू तो गुलाब की थोडी थी! लगा कि सारे दुनिया की बू उन गुलाबों में थीं, गुलाब की बू के इलावा. हवा पर एक हलकी सी आवाज़ ने उठी -&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;quot;हाँ, हम फरिश्ठे ने सोचा कि अगर हर गुलाब से कोई नई बू आए तो मज़ेदार हो जाए. यह हमारे तौफा था, और आदमी के रूप में हम हवेली में रहते थे, उन गुलाबों को देखबाल करने. एक दिन, शाम को एक लड़का हमारे यहाँ आया अपने गेंद को ढूँढने. हमने उसको बगीचों में ढूँढने दे दिया, और थोड़े देर में हम बाहर गए, और देखा कि वह बदमाश लड़का दस-दस गुलाबों को खिंचके खिंचके फेंक रहा था! हमको इतने दुःख और नफरत दोनों पड़े क्योंकि उसने कहा, &#039;छी! ये सब गुलाब नक़ल हैं! एक की बू भी ठीक नहीं!&#039; तो, हम क्या करते? हमारे एक वजह था हवाली में रहने, और जब हमने देखा कि एक छोटे लड़कों को भी हमारे गुलाबों से मज़ा नहीं आ रहा था, तो हमने जाने के लिए तैयारी की. गुस्से में हमने उस बेचारे लड़के पर शाप रखा, कि ४२० वर्षों के लिए उसको उन बगीचों का माली होना चाहिए, और कि उन गुलाबों से इतनी तेज़ और मीठी खुशबू आती कि किसी और को सह भी नहीं सकते. सिर्फ एक चीज़ इस शाप को थोड सकता है - अगर कोई जन है जो उस बेचारे माली को हँसा सकता है तो शाप थोड जायेगा. जो माली को हँसा सकता है वह खुश लाके हमारी हवेली में रह सकता है. अगर ऐसा कोई नहीं हैं तो ४२०वी साल तक सब - माली, बगीचे, और गुलाब - गायब हो जायेगा.&amp;quot;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गायब हो जायेगा, गायब हो जायेगा&amp;hellip;इन शब्दों सुनकर महिला एकदम उठ गयी। किसी तो कुछ ततकाल करना पडेगा, लेकिन छोटा बच्चा कहाँ से मिलेगा, जो वो माली से नहीं डरेगा? फिर, उस ने कोसा, वो कौन थी? वो क्या कर सकती थी, और वो माली और हवेली के बारे में उसका क्या लेना-देना था? कल तो उस ने सुना था न, माली सब के मौत करेंगे! अगर वो माली को बचाया तो उनके सब जीवन गायब, तो उस में क्या फायदा है? किन्तु लाल हवेली&amp;hellip;.वो लाल हवेली&amp;hellip;इतना खूबसूरत और बेहोश करनेवाली, शराब से ज़्यादा अच्छा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन ये विचार क्या हैं? ये सब तो सिर्फ़ एक सपना था, न? फरिश्ठे तो एकदम मानसिक लोग है, उस ने सिर्फ़ एक अजीब सपना देखा, सिर्फ़ यही बात है। वो किसी को यह नहीं बताऊँगी कि वो माली को बचानेवाली थी, गाववाले सब उसको पागलखाने में रखेंगे!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो अब क्या, उसकी वही ज़िन्दगी, वही मूढ में रहेंगे। परंतू वो यह नहीं जानती थी कि उस रात को सब गाववाले ने यही सपना देखा। सिर्फ़ यही बात रही थी, कौन इस सपनो का खबर सुनेगा और बच्चा ढूंढेगा?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शहर में तो किस्सी की भी माली से मुह लगने की हिम्मत नहीं हुई! काफी दिन बीत गए, और लोग फिर भी यही सोचते रहे के माली को हसाने के लिए बच्चा कैसे ढूंढे? इस्सी दौरान अमरीका से पर्यटकों का एक समूह इस छोटे से शहर में घूमने आये, और हवेली देखते ही उन्होंने सोचा की क्यूँ नहीं उसके सामने तस्वीर खींची जाये. तो वे हवेली की ओर बड़े, और उसके बगीचे में आ खड़े! सामने ही माली बैठी थी, और पहली बार इतने सारे लोगों को बगीचे में देखकर चौंक गयी!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पर इन विदेशी पर्यटकों को इस हवेली के इतिहास के बारे में कुछ नहीं पता था, तो उन्होंने सोचा की क्यूँ नहीं माली को पुछा जाए. तो वे माली के पास गए, पर माली को उनकी भाषा बिलकुल समझ ही नहीं आई. तो पर्यटकों ने सोचा कि माली से शब्दों में बात करना समय का व्यर्थ करना है, पर फिर इशारों से ही माली को पुछा के अगर वे उसके साथ तस्वीर खींच सकते हैं. माली को फिर भी समाज नहीं आया, पर वो उलझन में बस चुप चाप कड़ी रही. वह समझ नहीं पारी थी के क्या हो रहा है, पर इतने लोगों का ध्यान प्राप्त करके अन्दर से खुश हो रही थी. फिर सभ पर्यटकों ने माली के दोनों तरफ खड़े होके, कैमरा की तरफ देखते हुए, मुस्कुराने लगे. माली अपने चारों तरफ हस्ते हुए लोगों को देख कर और भी चौंक गयी. उसकी ज़िन्दगी में पहली बार कोई उसके साथ में खड़े होकर हंस रहा था - और एक जन ही नहीं, बहुत सारे जन इतनी बड़ी मुस्कान के साथ खड़े थे. माली अपना अकेलापन भूलकर, मुस्कुराने लगी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और फिर क्या - हवेली से एक बहुत जोर की आवाज़ आई, और एक तेज़ रौशनी सीधा माली और पर्यटकों पे पड़ी. एक जोर की हवा चली और बगीचे में सारे फूल लहराने लगे. सब देखकर चौंक गए, और देखते देखते ही पूरी हवेली जैसे चमकने लगी! फिर बहुत सारे फ़रिश्ते उससे उभर आये, और सीधे आसमान कि तरफ उडे और फिर गायब हो गए. आहिस्ते आहिस्ते सब साधारण रूप में वापस आ गया. पर्यटकों का मुह खुला का खुल ही रह गया, और बस बगीचे से बाहर निकलने लग गए.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सारे पर्यटक तो चले गए, पर वह सबका भल्ला करके चले गए. चाहे अनजाने से ही सही, माली के चेहरे पे मुस्कान लाके, हवेली कि इतने सालों कि उलझन ठीक कर गए. और इसके बाद सभ शहरवालों ने सुख का सह लिया, और हवेली से डरना बंद कर दिया. बल्कि आज तो उस हवेली में बड़ी बड़ी शादियाँ होती हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो ये थी गुलाब महल कि कहानी - कभी कभी अनजान लोग इतना भला कर जाते हैं, जो कोई अपना भी नहीं कर सकता.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;</description>
   <link>http://syllable.rice.edu/langex/BLOGS/post/32/699</link>
      <pubDate>Fri, 04 Sep 2009 17:34:12 -0500</pubDate>   
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    <item>
   <title>गुलाब महल: संहिता</title>
   <description>&lt;span style=&quot;font-size: medium; font-family: Helvetica&quot;&gt;&lt;div class=&quot;gmail_quote&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff0000&quot;&gt;उस रात को&amp;nbsp;वह महिला ने यह सपना देखा: वह उड़ रही थी, और नीचे था एक विशाल मैदान. &amp;nbsp;जब वह जमीं की तरफ चली तो उसकी ऑंखें इतनी बड़ी हो गई! &amp;nbsp;ऐसा था वह दृष्य जो उसके सामने था! &amp;nbsp;हज़ार फरिश्ठे! &amp;nbsp;कैसी&amp;nbsp;चमकती हुई रौशनी! कैसे रेशम-से पंखे! &amp;nbsp;उसको&amp;nbsp;लगा कि वह सच में&amp;nbsp;कोई&amp;nbsp;जन्नत तक&amp;nbsp;पहुँच गई! &amp;nbsp;वे फरिश्ठे काफी खुसर फुसर कर रहे थे, और इतने जोर से हंस रहे थे. &amp;nbsp;और - अभी क्या हुआ? &amp;nbsp;अचानक से वे फरिश्ठे कहीं पर चले&amp;nbsp;गए! &amp;nbsp;अभी, मैदान पर एक बड़ी हवेली थी, और उसकी चरों तरफ में गुलाब के बगीचे! &amp;nbsp;उस&amp;nbsp;महिला ने पास चली, और एक गुलाब लेके नाक पर उठी - अरे, यह क्या था? &amp;nbsp;कैसा पागलपन! &amp;nbsp;पहले फरिश्ठे और अभी, एक गुलाब जिससे एक गर्म पराठे के बू आ रही थी! &amp;nbsp;उसने&amp;nbsp;तुंरत से&amp;nbsp;उस गुलाब को फेंक दिया, और दुसरे को लिया. &amp;nbsp;अभी... &amp;nbsp;अरे! &amp;nbsp;इस गुलाब से कचड़ा की बदबू आ रही थी! &amp;nbsp;कितने गुलाबों थे, और एक की बू तो&amp;nbsp;गुलाब की थोडी थी! &amp;nbsp;लगा कि सारे दुनिया की बू उन गुलाबों में थीं, गुलाब की बू के इलावा. &amp;nbsp;हवा पर एक हलकी सी आवाज़ ने उठी -&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;gmail_quote&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff0000&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;gmail_quote&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff0000&quot;&gt;&amp;quot;हाँ, हम फरिश्ठे ने सोचा कि&amp;nbsp;अगर हर गुलाब से कोई नई बू आए तो मज़ेदार हो जाए. &amp;nbsp;यह हमारे तौफा था, और आदमी के रूप में हम हवेली में रहते थे, उन गुलाबों को देखबाल करने. &amp;nbsp;एक दिन, शाम को एक&amp;nbsp;लड़का हमारे यहाँ आया अपने गेंद को ढूँढने. &amp;nbsp;हमने उसको बगीचों में ढूँढने&amp;nbsp;दे दिया, और थोड़े देर में हम बाहर गए, और देखा कि वह बदमाश लड़का दस-दस गुलाबों को खिंचके खिंचके फेंक रहा था! &amp;nbsp;हमको इतने दुःख और नफरत दोनों&amp;nbsp;पड़े क्योंकि उसने कहा, &#039;छी! ये सब गुलाब नक़ल हैं! &amp;nbsp;एक की बू भी ठीक नहीं!&#039; &amp;nbsp;तो, हम क्या करते? &amp;nbsp;हमारे एक वजह था हवाली में रहने, और जब हमने देखा कि एक छोटे लड़कों को भी&amp;nbsp;हमारे गुलाबों से मज़ा नहीं आ रहा था, तो हमने जाने के लिए तैयारी की. &amp;nbsp;गुस्से में हमने उस बेचारे लड़के पर शाप रखा, कि ४२० वर्षों के लिए उसको उन बगीचों का&amp;nbsp;माली होना चाहिए, और कि&amp;nbsp;उन गुलाबों से इतनी तेज़ और&amp;nbsp;मीठी खुशबू आती कि किसी और को सह भी&amp;nbsp;नहीं सकते. &amp;nbsp;सिर्फ एक चीज़ इस शाप को थोड सकता है - अगर कोई जन है जो उस बेचारे माली को हँसा सकता है तो शाप थोड जायेगा. &amp;nbsp;जो माली को हँसा सकता है वह खुश लाके हमारी हवेली में रह सकता है. &amp;nbsp;अगर ऐसा कोई नहीं हैं&amp;nbsp;तो ४२०वी साल तक सब - माली, बगीचे, और गुलाब - गायब हो जायेगा.&amp;quot; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;</description>
   <link>http://syllable.rice.edu/langex/BLOGS/post/32/686</link>
      <pubDate>Fri, 04 Sep 2009 09:44:58 -0500</pubDate>   
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   <title>गुलाब महल: जयमीत</title>
   <description>&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-size: medium; font-family: Helvetica; color: #000099&quot;&gt;पर एक दिन ऐसा आया की हवेली की माली बाहर का दरवाज़ा बंद करना भूल गयी. पास में ही, छोटे बच्चे खेल कूद रहे थे के अचानक एक बच्चे ने गेंद दूर फेंक्दी और ये गेंद हवेली के बगीचों में जा पहुंची. पर ये छोटे बच्चे हवेली के इतिहास से अनजान थे. एक छोटा सा लड़का भागते हुए हवेली की तरफ गया. दूर से एक औरत ने जोर की आवाज़ दी: &amp;quot;बेटा रुक जाओ! अन्दर मत जाना!&amp;quot; पर बच्चा अनजान था और भागता रहा जब तक वो हवेली के बगीचों के बीच में खडा था और फिर माली को देखकर डर गया और रोने लगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;माली बच्चे की तरफ गयी और कहा, &amp;quot;मत रो बच्चे! मैं तुम्हे कुछ नहीं करुँगी. ये अपनी गेंद लेलो, पर मेरे लिए एक छोटा सा काम करदो.&amp;quot; बच्चे ने डरते हुए अपना सर हिलाया. माली बोली, &amp;quot;अपनी माँ को जाके बता दो की मेरे आखरी साँसे चल रही हैं, और मेरी मौत के बाद हवेली का क्या होगा किस्सी को नहीं पता! कोई मेरी मदद कर सकता है क्या?&amp;quot; बच्चे ने तुंरत से माली के हाथ से गेंद ली और जल्दी से बाहर रोते हुए भाग गया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भागते भागते ये बच्चा सीधा अपनी माँ के पास घर गया. उसे रोते हुए माँ एकदम से चौंक कर बोली, &amp;quot;क्या हुआ बेटा?&amp;quot; बच्चे ने डरी-सहमी आवाज़ में कहा, &amp;quot;माँ...हवेली माली...आखरी सांस...मौत...किस्सी को नहीं पता!&amp;quot; माँ पहले तो एकदम चुप हो गयी - बेटे के शब्द को जोड़ने की कोशिश करती रही. अचानक से उसे याद आया के बच्चा किस हवेली के बारे में बात कर रहा था, और एकदम से बेटे के शब्द जोड़कर अर्थ निकाल ने लग गयी. फिर चिल्ला कर बोली, &amp;quot;हवेली के माली ने हमें आंखरी साँसे गिनने के लिए बोला! सब की मौत करेगी और किस्सी को पता भी नहीं चलेगा?! हे भगवान! अब क्या होगा?&amp;quot;&lt;/span&gt;</description>
   <link>http://syllable.rice.edu/langex/BLOGS/post/32/685</link>
      <pubDate>Fri, 04 Sep 2009 09:43:07 -0500</pubDate>   
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   <title>गुलाब महल: प्रज्ञा</title>
   <description>&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-size: medium; font-family: Helvetica; color: #009900&quot;&gt;इसीलिए वह माली को सब नज़र झुकते थे, लेकिन कोई बगीचे के आस-पास आए तो वे एकदम सब ख्याल भूलकर भाग जाते थे। अब कितने साल हुए तो माली&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;background-color: #ffffff&quot;&gt;अकेला&lt;/span&gt;&amp;nbsp;रह रहकर बहुत&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;background-color: #ffffff&quot;&gt;गंभीर&amp;nbsp;&lt;/span&gt;हो रहा था। दुनिया के सब अच्छे दिलवाले लोग कहाँ गये? अगर ऐसा कोई लडका या लडकी आएगा तो क्या चमत्कार होगा?&lt;div class=&quot;im&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मगर अब नायक का आनेवाले वक्त ख़त्म हो रहा था। इस साल के बाद इस हवेली, जो अभी दूसरों (माली के सिवा) को कुछ नहीं था, पुरे तरह गायब होनेवाला था। अगर वो, वो जो आनेवाला था नहीं आया, इस साल में, हवेली गायब और उसके साथ हमारी माली। इन विचारों में घूमकर, माली हर दिन उसकी कुर्सी पर बैटकर परेशान हो रहा था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उसका राजा ने कितने बार उसको कहा था, &amp;ldquo;मेरी बात तो सुनिए, जब में&amp;nbsp;&lt;span style=&quot;background-color: #ffffff&quot;&gt;बहार-गाव&lt;/span&gt;&amp;nbsp;जाएगा तो हमारी हवेली पर ध्यान रको। अगर एक पल-बर भी आपका नज़र उतार जाएगा, तो मैं भी नहीं बता सकता हूँ कि हवेली क्या करेगी।&amp;ldquo; यह उसके अकेरी शब्द थे, हवेली की चक्रवाई से पहले। इन दिनों के बाद माली ने दिल बर इन शब्दों को याद रखा था, मगर अब उसका क्या फायदा था? कुछ नहीं बदलता न कोई कभी न आएगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;ldquo;आह&amp;rdquo;, माली के अकेरी दिन ऐसी ही रहेंगे, बिना दोस्त या दुश्मन, दूसरे लोगो के बिना।&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;</description>
   <link>http://syllable.rice.edu/langex/BLOGS/post/32/684</link>
      <pubDate>Fri, 04 Sep 2009 09:42:27 -0500</pubDate>   
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   <title>गुलाब महल: संहिता</title>
   <description>&lt;span class=&quot;Apple-style-span&quot; style=&quot;font-size: medium; font-family: Helvetica&quot;&gt;&lt;div class=&quot;im&quot;&gt;&lt;div class=&quot;gmail_quote&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff0000&quot;&gt;बहुत समय पहले, एक छोटे शहर में एक लाल हवेली थी जिसका नाम &amp;quot;गुलाब महल&amp;quot; था| हवेली तो बड़ी थी, और सुंदर भी, लेकिन अगर तुम उसके सामने होते तो तुम हवेली को ज़रूर नहीं देखते. इतने खूबसूरत थे सब बगीचे जो हवेली की सारी तरफ में थे.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;gmail_quote&quot;&gt;&lt;div class=&quot;im&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #ff0000&quot;&gt;&lt;br /&gt;उस हवेली में कोई नहीं रहता था. तीन सौ सालों के लिए एक बड़े खानदान राज-रानियों की तरह रहता था उस हवेली में, लेकिन इतने साल हो चुके थे और किसी को याद नहीं था कि उनका नाम क्या था या किस वजह से उस परिवार का एक ही जन भी ज़िंदा नहीं था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सिर्फ़ एक माली था, जिसकी दिखाई से तुमको पता नहीं चलते कि यह एक, दो, या तीन सौ साल का होता!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वह माली एक झोपड़ी में रहता था, और अगर उसको हवेली के बारे में पूरी तरह मालूम था तो किसीको पता नहीं था. अगर तुम पूछते, शहेरवाले उस माली से क्यों नहीं पूछते थे कि हवेली के लोगों को क्या हुआ, तो तुमको मैं अभी यह बताती हूँ: कि बगीचे जो उस हवेली के सारी तरफ में थे मोटे मोटे गुलाबों से भरे हुए थे, और उन गुलाबों से इतने तेज़ खुशबू थी कि अगर तुम पास जाते, तो ज़रूर तुमको तुरंत नशा औरे बेहोशी पड़ती!&lt;/span&gt;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;</description>
   <link>http://syllable.rice.edu/langex/BLOGS/post/32/683</link>
      <pubDate>Fri, 04 Sep 2009 09:40:24 -0500</pubDate>   
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   <title>स्वागत है :-)</title>
   <description>आप सब का नया चिट्ठा पृष्ठ खुल चुका है। इस पन्ने पर आप अपने विचार दुसरों के सामने पेश करेंगे। तो चलिए इस नए सत्र की शुरुआत करते हैं। इस सप्ताह आप सब एक कहानी बुनेंगे। पहले कहानी का एक शीर्षक दें और फिर ४-५ पंक्तियां लिखकर कहानी की&amp;nbsp;शुरुआत करें।</description>
   <link>http://syllable.rice.edu/langex/BLOGS/post/32/666</link>
      <pubDate>Mon, 31 Aug 2009 14:53:15 -0500</pubDate>   
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