HIND201/202

सोचना ज़रूरी है

NikhilShekar | 27 September, 2008 20:45

हमारी तरफ़ एक तूफ़ान आ रहा है. लेकिन मेरे कमरे में भी एक तूफ़ान आया था. कल मेरे dorm के कमरे में बहुत सामान था, और जो कुछ भी मुझे नहीं चाहिए था, वह सब मैंने कचरे में फैंक दिया. मैं एक कागज़ का टुकडा फैंकने बाहर गया, और मैं कचरापेटी तक गया था. वह कचरापेटी दरवाज़े के बाहर था. जब मैं दरवाज़ा खोलकर बाहर गया, तब मुझे एहसास हुआ कि मैंने चाबी अन्दर रख दी थी. इसलिए, मैं अन्दर नहीं आ सका. Jonathan, जो मेरे साथ dorm के कमरे में रहता है, उस समय कमरे में नही था. जब मैं पहली  मंज़िल गया, मुझे याद आया कि वहाँ RAs को मदद के लिए पूछ सकता था. दोनों के कमरे के दरवाज़े में खटखटाया लेकिन कोई नहीं आया. मेरे पास फ़ोन भी नहीं था, क्योंकि मेरा फ़ोन भी कमरे में ही था.

मेरे पास सिर्फ़ एक ही रास्ता था. मैं college से बाहर गया और मैंने उम्मीद की कि Jonathan अपने चाबी के साथ आएगा. बहुत देर वहाँ बैठा, लेकिन मेरा roommate नहीं आया. मुझे डर लगने लगा, और मैंने police से मिलने का फ़ैसला किया. लेकिन उस समय, एक गाड़ी आई, और मैं रुख गया. मैंने सोचा, अरे! कैसे भूल सकता हूँ? Masters से पूछ सकता हूँ! मैंने जल्दी से उस गाड़ी के खिड़की में खटखटाया और मेरे college के master को मेरी समस्या बताई. कुछ देर के बाद मैं दुबारा मेरे कमरे में बैठ रहा था, और बहुत खुश था. अब मैं समझ गया हूँ कि जब मैं कचरा फैंकना चाहता हूँ, मुझे सोच समझ के करना है.

Jones College

Comments

Re: सोचना ज़रूरी है

janhvi | 27/09/2008, 22:29

हस हस के पेट दखने लगा ।

चाबियों का महत्व!!!

Kavina Juneja | 08/10/2008, 16:31

तुम्हारी यह कहानी पढ़ कर बहुत मज़ा आया। कमरे के 'तूफान' के कारण नुम्हे कमरे के बाहर कितनी देर बैठना पड़ा। कभी सोचा न था कि कूड़ा फैंकना भी कितने खनरों से घिरा है!?!

Re: सोचना ज़रूरी है

प्रज्ञा भवालकर | 02/12/2008, 16:01

बहुत अच्छी कहानी! आपको क्या हुआ अच्छा नहीं है, मगर होता है। आप कौंसा कौलेज में है? हमरे मस्टर कुछ नहीं करते है। पहले मैंने सोचा कि आपकी कहानी एक एकदम दूसरा विषय पर था।

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