HIND201-202

ASB और समुद्र कछुआ

RamyaRamanathan | 30 April, 2008 13:44

इस स्प्रिंग ब्रेक के लिए मैं एक अस्ब ट्रिप पर गयी. Environmental क्लब के लिए हम फ्लोरिडा गए और हम ने एक नेशनल पार्क के लिए काम किया मैअमी फ्लोरिडा मैं एक बहुत बड़ा पार्क, बिस्काय्ने नेशनल पार्क के लिए हम ने एक हफ्ते के लिए स्वयम सेवा की.

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कविता

DhruvVenkatraman | 29 April, 2008 23:55

दिन रात में सोचते की इस दिन के बाद क्या होते अच्छा हो या बुरा मेरे जीवन के आगे समय बिगड़ जाता ये होता है एवेर्य्दय पर कुछ और नही सोचा क्योंकि यह महत्वपूर्ण है टू मैंने सोचा - कुछ करो टू लिखना शुरू की बहुत कोशिश के बाद में बन गया कवि कोई मेरा कविता नही समाज सकता अमरीकी, चीन या सिन्धी कई लोग भी पुच्तय क्या यह सच में हिन्दी?

कविता

DhruvVenkatraman | 29 April, 2008 23:55

दिन रात में सोचते की इस दिन के बाद क्या होते अच्छा हो या बुरा मेरे जीवन के आगे समय बिगड़ जाता ये होता है एवेर्य्दय पर कुछ और नही सोचा क्योंकि यह महत्वपूर्ण है टू मैंने सोचा - कुछ करो टू लिखना शुरू की बहुत कोशिश के बाद में बन गया कवि कोई मेरा कविता नही समाज सकता अमरीकी, चीन या सिन्धी कई लोग भी पुच्तय क्या यह सच में हिन्दी?

क्रिकेट

DhruvVenkatraman | 29 April, 2008 22:53

यह क्रिकेट सीरीज़ भारत एवं दक्षिण अफ्रीका के बीच मई बहुत अच्छा था. (More)

माता-पिता

DivyaPande | 29 April, 2008 18:11

जब हमारे माता-पिता बूढ़े होते हैं, तो उनको मदद की ज़रूरत होती है। जब यह होता है, कई लोग सोचते हैं कि बच्चे को माता-पिता के खयाल रखना चाहिए। और कई लोग सोचते हैं कि माता-पिता को आपने आप पर खयाल रखना चाहिए। मेरे खयाल में, जब माँ-बाप बूढ़े होते हैं, तो उनके खयाल रखना बच्चो की ज़िम्मेदारी है। सारी ज़िंदगी हमारे माँ-बाप हमारा खयाल रखते हैं : खिलते हैं, मदद करते हैं, पैसे देते हैं, और सबसे महत्वपूर्ण - वे हमको प्यार करते हैं। और हमे माँ-बाप दो इज़्ज़त देखनी चाहीए। इज़्ज़त और प्यार - इन दो कारण की वजह से हमारी ज़िम्मेदारी है कि जब हमारे माँ-बाप बूढ़े होते हैं हमे भी उनकी मदद करनी चाहीए और उनको प्यार देना चाहीए। लेकिन यह बात माँ-बाप की उम्मीद नहीं होनी चाहीए। उनके प्यार हमारे लिए अनकनडिशनल है। हा, मुझे आशा है कि सब बच्चे उनके माँ-बाप का खयाल रखेंगे, लेकिन यह माँ-बाप का हक नहीं है। सिर्फ उनकी आरज़ू हो सखती है।

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तारे जमीन पर

DivyaPande | 29 April, 2008 17:31

फ़िल्म "तार जमीन पर" बहुत अच्छी और महत्वपूर्ण फ़िल्म है। सब माता-पिताओ को देखना चाहिए। फ़र्म से हम समझते है कि हर एक बच्चा अलग है। कई बच्चे बहुत पर्दते हैं, कई बच्चे बाहर खेलते हैं, या कई बच्चे खानिया लिखते हैं। फ़िल्म का "प्रोतगोनिस्ट" - इशान - अलग आंखें से दुनिया देखता है। दुनिया इशान को रंग और खूबसूरती दिखता है। लेकिन इशान के माता-पिता सिर्फ चाहते है कि इशान स्कूल में अच्छा काम करे। उनके लिए स्कूल के "ग्रदेस" सब से ज्यादा महत्वपूर्ण है - कुछ और नहीं। लेकिन इशान इतना उदास है, और उसके माता-पिता यह नहीं देख सकते हैं। फ़िल्म हमको सिखाती है कि बच्चो को सुनना चाहिए। दुनिया के बच्चे तारे जमीन पर हैं।

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इस समाज

DivyaPande | 29 April, 2008 16:56

इस दुनिया, इस समाज में, जीतना सबसे महत्वपूर्ण चीज़ नहीं है। लेकिन हमारी समाज इतना प्रतियोगी है, कि यह भूलना आसान है। बहुत लोग सिर्फ पदाई या काम या पैसे कामना के बारे में सोचते हैं। उनके लिए सफलता हमेशा मन पर है। रिश्तेदार सिर्फ फायदा या मुनाफे के लिए है। लेकिन जीवन छोटा है। किसी को पता नहीं है कि काल क्या ले आएगा। मौत, बीमारी, और बदलाव ज़िंदगी में यह सब मुमकिन है। तो फिर ज़िंदगी में कोनसी चीज़े महत्वपूर्ण है? परिवार, दोस्ती, हासि - मज़ाक, प्यार - यह सब चीज़ी नहीं भूल सकते है। और कल? हम देखेंगे...


सरफ'स अप

DivyaPande | 29 April, 2008 16:28

छुटटीयो पर मैं और मेरे परिवार ने एक बहुत "क्युत" फ़िल्म देखी - "सरफ'स अप"। एक "कम्प्यूटर आनिमटद" फ़िल्म है, बच्चो के लिए, लेकिन सब लोग फ़िल्म से आनद ले सकते हैं। फ़िल्म एक चिडियो की "सरफिंग" प्रतियोगिता दिखाती है। फ़िल्म के शुरू में एक छोटा "पेगविन" - उसका नाम कोडी है - अभी तक अच्छा "सुर्फेर" नहीं है, लेकिन उसके पास बहुत बड़ा दिल है। एक बुदा पेगविन -"ज़ी" उसका शिक्षक बन जाता है। ज़ी कडी को बहुत चीज़ सिखाता है। सरफिंग और ज़िंदगी में, जीतना सबसे महत्वपूर्ण चीज़ नहीं है। ज़ी बोलता है, मज़ा लेना नहीं भूलना। और अच्छे "सरफिंग" के लिए पानी के साथ एक होना चाहिए। और सफलता भी आएगी। शुरू में कडी ज़िद्दी है, लेकिन फ़िल्म के आंत में, उसने पाठ सिखा और अब वो एक अच्छा "सुर्फेर" "पेगविन" है।


शुक्रिवार की दोपहर

angiemyers | 29 April, 2008 12:36

अरे, मेरा मनपसंद हफ्ते का समय है, शुक्रिवार की दोपहर! गुरुवार को मेरे सब klas पूरे होते हैं लेकिन शुक्रिवार की दोपहर है शुक्रिवार अनोखा है हवा सब से तज़ी है, सूरज सब से चमकीला है, और दुनिया में सब अच्छा है मर्टेल में, हमारे speakers से बहुत जोर संगीत है. मुझको बैठना और अमरेतो सौर पीना पसंद है, सब से अच्छा आराम है. काम के बाद, मैं मर्टेल को जाऊंगी और मुझे मेरे दोपहर का मजा लूंगी... सिर्फ दो घंटे और


मेरे जनम दिन

angiemyers | 29 April, 2008 12:35

मैं बुदी हूँ। छुहिया के दौरान , मैं बाईस साल की हुई। मेरे जनम दिन के लिए, मेरे दोस्त के साथ एक रेस्तौरांत (ला दुनी) गायी। सब दोस्त दल्लास से आये, लेकिन नहीं दोस्त हौस्तों से आये। हम ने मोजितोस और किपिरिन्हस पिए मेरे दोस्त गिलिहारी paraphanalia लाये मैं बहुत खुश थी!


ग्रौंड होग का दिन!

angiemyers | 29 April, 2008 12:34

आज मेरा मनपसंद दिन है: ग्रौंड होग का दिन! हर साल, ग्रौंधोग (punksatowney phil) कहेगा कि सरदी कब जायेगी. फेब्रुअरी दो, ग्रौंड होग उठेगा, अपने घर से निकलेगा और अपनी छाया खोजेगा अगर ग्रौंधोग छाया नहीं देखता है परंपरा बोलती है कि वह छे हफ्ते की सर्दी होगी अगर ग्रौंड होग छाया देखता हैं, बहार जल्दी आयेगी. इस साल, मुझे आशा है कि ग्रौंड होग छाया देखेगा क्योकि मुझे बहार पसंद है (अगर ठंड बनी रही तो मैं मर जाऊंगी)


शाकाहारी क्लब

HrishikeshHari | 29 April, 2008 11:26

पच्चीस सालो के लए, हारे कृष्णा मंदिर हमारी स्कूल के लए प्रसाद देते है. हर महीने सनिवार सवेरा "शाकाहारी क्लब"मंदिर जाते है और प्रसाद तैयार करने मदद करते है. रात को सन्यासी लोग हमारी स्कूल पर गरम और स्वादीश खाना लाते है. हर महीना पचास छात्र को दो डॉलर, सिर्फ़ दो डॉलर, के लए ऑल यू कन ईट भारीतीया खाना मिलता है. प्रसाद हमारी आत्मा धोते है, लें व्याहरिक भी है क्यूंकी सेरवेरी शनिवार रात को बाँध होता है. इस अनुकूल प्रोग्राम का नया ख्यासेवाके चाहिए क्योंकि सब शाकाहारी कलूब का भाबिशया आप लोगो के हाथो मे है. हमारी ज़िम्मेदारी भी कई. क्यो? क्योंकि हमे एक समाज मे र्हेते है और हमे एक दूसरे की ज़रूरी है.

लरेन्ज़ी वी टेक्सास

HrishikeshHari | 29 April, 2008 11:17

पच साल पहेले, अमरीकी की सुप्रीम कोर्ट ने एक नियम, लरेन्ज़ी वी टेक्सास, मे कहा के समलिंगी लोग के पास एकंत्त कॅया हम है और टेक्सास की आंटीसमलिंगी हक अवेधानियाक है.

यहा नियम बहुत म्हत्वपुर्णा और विवादी है. लरेन्ज़ी नियम सिर्फ़ अमेरिका मे महत्वपुर्णा नही था. लरेन्ज़ी का ज़ोर हिन्दुस्तान मे भी लगा.

२००३ मे, एक फॉर्डम लॉ स्कूल की प्रोफेसर, सोन्या कत्याल, ने लिखा की हिन्दुस्तान मे लरेन्ज़ी के बारे मे खराब प्रहिक्रिया थी. सीतेंबेर २००३ मे हिन्दुस्तानी स्रकार ने एक रिपोर्ट निकाला, और र्पोर्ट मे लिखा था की त्राफ सहमित और टॉलरेन्स दिखाया, लरेन्ज़ी के हाते हुए भी हिन्दुस्तान समलिंगियो के बारे मे अंत्याचारी है. हिन्दुस्तान मे समलिंगी लोग आपराधिक है. कात्याल ने कहा के हिन्दुस्तान सिर्फ़ नाम मे सेकुलर है, सक्चाई मे आपराधियक है. हिन्दुस्ताई आंटी-समलिंगी क़ानून आइरॉनिक भी है क्योंकि ब्रिटिश स्रकर ने १८०० मे आंटी-समलिंगी क़ानून बनाया और आज का क़ानून पुराने क़ानून के निशान है. कात्याल ने कहा की इंटरनॅशनल मोरल कोड मे टॉलरेन्स की ज़रूरत है.


एक आखरी ब्लॉग

ShamoorAnis | 29 April, 2008 04:51

शुक्रिया गौतमी जी (More)

संगीत

angiemyers | 29 April, 2008 02:08

संगीत में, मेरा taste बहुत बुरा हैमेरे बेचारे roomates! मुझे सब संगीत (Death metal नहीं) पसंद हैंशायद कारण है की मुझे रंदोम combinations पसंद हैंइस घंटा, मैं तोरी अमोस "मुझे सोमवार पसंद नहीं ", अरबिक पॉप दुएत जर्मनी से "हबीबी", और string quartet tribute to the killers "Brightside-जी "को सुनना थादेखो, मेरा taste बहुत अजीब हैमेरा ख्याल में, मेरा taste "खास" हैऔर अगर मेरा दोस्त मेरा संगीत पसंद नहीं, तो मैं headphones हैं

मेरा संगीत:

http://www.youtube.com/watch?v=zvC8GpOL4Lk

http://www.youtube.com/watch?v=84WLtcbgs8Q

http://www.youtube.com/watch?v=XirdPLIo7QU


 
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